रुद्रपुर
जिले में वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने संबंधित विभागों को समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने वन विभाग को निर्देशित किया कि वन क्षेत्रों में संभावित आग की घटनाओं को रोकने के लिए समय से फायर लाइन तैयार की जाएं। इसके साथ ही जनपद के तीनों वन प्रभागों में मास्टर कंट्रोल रूम स्थापित कर उनके संपर्क नंबर आम जनता के लिए सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी घटना की सूचना तत्काल प्रशासन तक पहुंच सके।
उन्होंने ब्लॉक और ग्राम स्तर पर गठित वनाग्नि सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने, संवेदनशील क्षेत्रों से लगे गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाने तथा नियमित बैठकों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वन क्षेत्र से जुड़े गांवों के युवाओं एवं महिला मंगल दलों को स्वयंसेवक के रूप में तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए फायर सर्विस, पुलिस, राजस्व, शिक्षा विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करना होगा। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी को ग्रीष्मकाल के दौरान सरकारी और निजी चिकित्सालयों में बर्न यूनिट की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी यूसी तिवारी ने बताया कि जनपद के तीनों वन प्रभागों में कुल 61 क्रू स्टेशन स्थापित किए जाते हैं तथा लगभग 939 नियमित एवं दैनिक श्रमिकों की तैनाती की जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि गत वर्ष ग्रीष्मकाल में वनाग्नि से 1.85 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था। साथ ही विकासखंड और ग्राम स्तर पर समितियां गठित कर दी गई हैं।
बैठक में अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, एसीएमओ डॉ. मनोज शर्मा, उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट व गौरव पांडेय, जिला विकास अधिकारी सुशील मोहन डोभाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उमा शंकर नेगी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे, जबकि सभी उप जिलाधिकारी एवं वनाधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।











