डीएम नितिन सिंह भदौरिया की दो टूक—कालाबाजारी, लापरवाही और फर्जी डिलीवरी पर कड़ी कार्रवाई तय
रूद्रपुर
जनपद में गैस वितरण को लेकर बढ़ती शिकायतों और अफवाहों के बीच आज दिनांक 01 अप्रैल 2026 को एक आयोजित बैठक में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए गैस एजेंसी संचालकों को सख्त चेतावनी दी है। जिला सभागार में आयोजित बैठक के दौरान डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गैस डिलीवरी में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने दो टूक कहा कि यदि किसी भी उपभोक्ता को बिना गैस सिलेंडर डिलीवर किए मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज भेजा गया, तो संबंधित एजेंसी और ऑपरेटर के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। डीएम ने इस तरह की फर्जी गतिविधियों को गंभीर अपराध बताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में डीएम ने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देशित किया कि पूर्ति निरीक्षकों के माध्यम से गैस गोदामों के स्टॉक की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने एजेंसी प्रबंधकों को साफ निर्देश दिए कि गैस बुकिंग के बाद तय समय सीमा में ही होम डिलीवरी की जाए और किसी भी उपभोक्ता को सीधे गोदाम या एजेंसी से सिलेंडर न दिया जाए। डीएम भदौरिया ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संचालित होनी चाहिए, जिससे आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और यदि कोई गलत सूचना फैलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू या व्यावसायिक गैस की कालाबाजारी में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिला पूर्ति अधिकारी विनोद चंद्र तिवारी ने बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में गैस की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक घरेलू गैस का दैनिक वितरण 11,616 सिलेंडर रहा, जबकि 9,392 सिलेंडर अवशेष हैं। वहीं व्यावसायिक गैस का वितरण 404 सिलेंडर और 1,366 सिलेंडर शेष हैं।
बैठक में अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय सहित विभिन्न गैस एजेंसियों के प्रबंधक मौजूद रहे, जबकि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद अब गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी निगरानी तय मानी जा रही है। प्रशासन के इस कड़े रुख से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद नजर आ रही है।











